
मुंबई: विशेष एनआईए अदालत ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार इकबाल इब्राहिम खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि खान संगठन का सक्रिय सदस्य था।
खान के वकील आर. सत्यनारायणन ने दावा किया कि इस मामले में लागू सभी प्रावधानों और प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन किया गया है और अभियोजन पक्ष के दावे प्रथम दृष्टया स्वीकार्य नहीं हैं।
खान द्वारा आपत्तिजनक संदेश प्रसारित करने के दावे का खंडन करते हुए बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब ये संदेश भेजे गए थे तब पीएफआई पर प्रतिबंध नहीं था। इसके अलावा, बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि केवल संदेश प्राप्त करना और आगे भेजना गैरकानूनी गतिविधि का समर्थन करने, उसमें सहायता करने या उसे उकसाने का कार्य नहीं माना जा सकता। इस याचिका का विशेष अभियोजक सुनील गोंसाल्वेस ने विरोध किया और तर्क दिया कि खान भोले-भाले मुस्लिम युवाओं को उकसा रहा था और उन्हें पीएफआई में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था।
अदालत ने गौर किया कि आरोपपत्र में एटीएस द्वारा एकत्र किए गए व्यापक इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। खान के मोबाइल फोन में कथित तौर पर धार्मिक स्थलों का भड़काऊ प्रदर्शन करने वाला डेटा था, जिसमें झूठा दावा किया गया था कि मस्जिदों को गिराकर मंदिर बनाए गए हैं।
अदालत ने जमानत नामंजूर करते हुए कहा, “सभी संदिग्ध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। कई ऑडियो क्लिप हैं जिनसे संदिग्धों की आपस में हुई बातचीत का पता चलता है। पीएफआई का सक्रिय सदस्य होने के नाते, आवेदक मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को उकसाकर पूरे भारत में इसके राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा था।”
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि साक्ष्यों से पता चलता है कि खान प्रतिबंधित संगठन के एजेंडे को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा था और पूरे देश में सांप्रदायिक उकसावे के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा था।
