
वसई तहसीलदार कार्यालय एक बार फिर बड़े रिश्वत कांड की चपेट में आ गया है, जिससे राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।
भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) की ठाणे इकाई ने मंगलवार दोपहर अनिल प्रभाकर चौबल नामक एक व्यक्ति को कथित तौर पर 7 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।
यह रिश्वत वसई में शिकायतकर्ता की जमीन पर अवैध निर्माण को गिराने से रोकने और जमीन को गैर-कृषि (एनए) भूमि में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए मांगी गई थी। शुरुआत में 40 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में बातचीत के बाद 7 लाख रुपये तक कम कर दिया गया। निजी एजेंट अनिल चौबल को रंगे हाथों पकड़ा गया, जबकि जांच में ऊपरी तहसीलदार (गैर-कृषि विभाग) विनोद बालकृष्ण धोत्रे का नाम सामने आया है।
एसीबी की कार्रवाई के बाद विनोद धोत्रे फरार हो गए और फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। वसई पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया जा रहा है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं।
इस घटना से काफी आक्रोश फैल गया है, क्योंकि वसई राजस्व विभाग का भ्रष्टाचार का लंबा इतिहास रहा है। समाचार रिपोर्टों में बताया गया है कि ठाणे एसीबी द्वारा बार-बार चलाए गए जागरूकता अभियानों के बावजूद, भ्रष्टाचार का बोलबाला बना हुआ है। 2007, 2010 और 2020 में तहसीलदारों और क्लर्कों से जुड़े पिछले मामलों ने विभाग की साख को बार-बार धूमिल किया है।
एसीबी ने एक बार फिर वसई-विरार क्षेत्र के नागरिकों से भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्क रहने और ऐसी शिकायतों को सीधे भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो को दर्ज कराने का आग्रह किया है।
