
नवी मुंबई: बेलापुर की एक सिविल अदालत ने नवी मुंबई नगर निगम के नवनिर्वाचित पार्षद को कार्य करने से रोक दिया है। अदालत ने अवैध निर्माण से संबंधित तथ्यों को छुपाने के आरोप वाली चुनाव याचिका में प्रथम दृष्टया सत्यता पाई है।
यह अंतरिम आदेश 2 फरवरी को सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) ने शिवसेना (शिंदे गुट) के उम्मीदवार अश्विनी विजय माने द्वारा वार्ड 23/बी से चुनाव लड़ने के बाद दायर याचिका पर पारित किया।
माने ने भाजपा की रूपाली किस्मत भगत के चुनाव को चुनौती दी थी, जिन्होंने 10,571 वोटों से जीत हासिल की, जबकि माने को 5,204 वोट मिले। चुनाव 15 जनवरी को हुए थे और परिणाम 19 जनवरी को घोषित किए गए थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भगत ने अपने पति और रिश्तेदारों द्वारा CIDCO की ज़मीन पर निर्मित दो अवैध बहुमंजिला इमारतों से अपने संबंध का खुलासा नहीं किया, यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
अदालत ने पाया कि कथित तौर पर जानकारी छिपाने से भगत की चुनाव लड़ने की योग्यता प्रभावित होती है और अगली सुनवाई तक उन्हें पार्षद के रूप में कार्य करने से रोक दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।
