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समीक्षा तैलंग के व्यंग्य संग्रह का पुणे में विमोचन

मुंबई। 15 अप्रैल को प्रबुद्ध मूर्तियों के हाथों समीक्षा तैलंग की तीसरी पुस्तक व्यंग्य संग्रह "व्यंग्य का एपिसेंटर" का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय, कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार डॉ दामोदर खड़से, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सुनील देवधर, पुस्तक समीक्षक फर्ग्यूसन कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ संतोष धोत्रे, दुबई से पधारे भारती भाषा संवर्धन संस्थान के अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम का अप्रतिम संचालन दीप्ति पेठे ने किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई। श्री सुयश तैलंग ने श्रीफल और अंगवस्त्र से सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर भूपेन्द्र कुमार जी ने सौ. समीक्षा तैलंग को भारती भाषा संवर्धन संस्थान का जनरल सेक्रेटरी पद नियुक्ति की घोषणा की। कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।


डॉ. प्रेम जनमेजय जी ने 9 मई को दिल्ली में समीक्षा तैलंग को रवीन्द्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान मिलने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में अतिथि के रूप में अलग-अलग विधाओं के साहित्यकार मौजूद होने से व्यंग्य को व्यापकता मिली है। उन्होंने पुस्तक के लेखों पर चिंतनपरक विस्तृत चर्चा की। प्रेम जनमेजय जी ने बताया कि समीक्षा के व्यंग्य सामाजिक सरोकारों को लेकर हैं। लेखन में कहीं भी हडबडी नहीं दिखती। डॉ. दामोदर खड़से जी ने सभी अतिथियों के उद्बोधन पर अपने विचार व्यक्त किए। समीक्षा तैलंग के व्यंग्य के इतर लेखन पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समीक्षा जी में शब्द चित्र लिखने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के लाडले व्यक्तित्व पु ल देशपांडे के लेखों को समीक्षा तैलंग अनुवाद कर रही हैं। उन्होंने यह चुनौतीपूर्ण काम अपने हाथ में लिया है। इससे पु ल देशपांडे जी को महाराष्ट्र के बाहर भी अधिक से अधिक लोग पढ़ पाएंगे। डॉ सुनील देवधर जी ने कहा कि समीक्षा तैलंग के पास व्यंग्य की दृष्टि तो है ही साथ में पहले वो पत्रकार रह चुकी हैं इसलिए उनके पास कैमरे की आंख भी है। भाषा के माधुर्य के साथ दृश्यों का सौंदर्य भी है। कार्यक्रम के अंत में समीक्षा तैलंग ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समीक्षा तैलंग की पुस्तकों की अच्छी बिक्री हुई। कार्यक्रम में पुणे के गणमान्य साहित्यकार बड़ी संख्या में मौजूद थे।


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