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सड़े शव का "चेहरा" करेगा हत्यारे की खोज , 11 माह पहले मिली थी महिला की सड़ी लाश



मुंबई। मुंबई के गोवंडी स्थित जाकिर हुसैन नगर इलाके में 11 महीने पहले मिली एक अज्ञात महिला के सड़े हुए शव की पहचान करने के कई असफल प्रयासों के बाद,आखिरकार मानखुर्द पुलिस को उम्मीद की किरण दिखाई दी है।क्योंकि केईएम अस्पताल ने उन्हें मृतक महिला के चेहरे का पुनर्निर्माण (स्केच) बनाने में मदद की है।पुलिस अब उस महिला के स्केच की मदद से पहले उसके परिवार और उसके बाद पीड़िता के हत्यारे तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

गौरतलब है की मानखुर्द पुलिस को करीब 11 महीना पहले हाथ पैर बंधा हुआ एक 18 से 20 वर्षीय युवती का शव बरामद किया था।इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज कर जांच कर रही थी,लेकिन बाद में मामले की जांच क्राइम ब्रांच यूनिट 6 को ट्रांसफर कर दिया गया है।पुलिस के अनुसार महिला का शव बहुत ही ख़राब हालत (सड़ा हुआ) में मिला था।इसकी आयु 18 से 20 वर्ष के बीच हो सकती है.इसकी कथित तौर पर हत्या की गई है,क्योंकि उसके पैर और गर्दन दुपट्टे से बंधे थे और शरीर को प्लास्टिक की थैली में लपेटा गया था। पुलिस के मुताबिक महिला ने चांदी की पायल पहन रखी थी,जिस पर ट्रेडमार्क 'बीएस' लिखा हुआ था।इतना ही नहीं पुलिस को उसके हाथ में एक लाल चूड़ी और उंगली पर सफेद मोती जड़ा चांदी का छल्ला भी मिला था।जांच के दौरान पुलिस ने शहर के कई ज्वैलर्स और वेंडर्स से पूछताछ की,जिन्होंने बीएस ट्रेडमार्क वाली चांदी की पायल बेची थी।मानखुर्द पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने इस संवाददाता को बताया कि कोल्हापुर स्थित एक कंपनी ने बीएस ट्रेडमार्क के साथ चांदी की पायल बनाती है।


कंपनी के मालिक से संपर्क किया गया और मालिक से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि बीएस मार्क वाली चांदी की पायल राज्य के कई शहरों- जिलों और राज्य के बाहर कई विक्रेताओं को थोक में बेची जाती है।पायल पर कोई नंबर अंकित नहीं होते है।इसके लिए कौन सी पायल किसको बेची गई है यह बताना संभव नहीं है।पुलिस ने इस मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की, आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई आदि शहरों के पुलिस स्टेशन में दर्ज लापता केसों को भी देखा,बावजूद ऐसा कुछ भी सुराग नहीं मिला जिससे पुलिस मृतक महिला की पहचान हो सके और उसके हत्यारे तक पहुंचा जा सके।एक पुलिस अधिकारी ने बताया की इसके बाद हमने मनपा के केईएम अस्पताल के डॉक्टरों से मृतक महिला का चेहरा लगाने के लिए संपर्क किया।


केईएम अस्पताल की सहायक प्रोफेसर और फोरेंसिक ओडोन्टोलॉजिस्ट डॉक्टर हेमलता पांडे ने कहा है की हमने शरीर को स्कैन किया,फिर भारत के लोगों के शरीर के बनावट के हिसाब से उसके उम्र का पता लगाने के लिए रेडियोलॉजिकल तकनीक का सहारा लिया।स्कैन की गई खोपड़ी का हमने 3 डी डिजिटल तकनीक का उपयोग कर चेहरे का फोरेंसिक कर उसका रीकंस्ट्रक्शन किया।पहले हम ज्यादातर मैनुअल रीकंस्ट्रक्शन किया करते थे,लेकिन महामारी के बाद हम धीरे-धीरे 3 डी डिजिटल टेक्नीक का सहारा लेने लगे हैं।

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