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केंद्र सरकार की तैयारी- 4 दिन का सप्‍ताह, 3 दिन छुट्टी

मुंबई १ अक्‍टूबर,२२ से केंद्र सरकार काम के घंटे ८ से १२ घंटे करने की तैयारी में है । संसद ने अगस्‍त, २०१९ में ४ श्रम कानून (औद्योगिक संबंध, काम की सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य व सामाजिक सुरक्षा) में बदलाव किया था । ये नियम सितबंर, २०२० में पास कर दिए गए । भारत के २९ केंद्रीय श्रम कानूनों को ४ कोड में बॉंटा है जिसमें कर्मचारी ८ घंटे की बजाए १२ घंटे काम करेंगे । समय बढ़ने से एक दिन की अधिक छुट्टी मिलेगी मतलब अब सप्‍ताह में २ दिन की बजाए ३ दिन की छुट्टी होगी । काम का सप्‍ताह ४ दिन का हो जाएगा ।

नये श्रम कानून के मसौदा नियमों में १५ से ३० मिनट गिनकर ओवर टाइम में शामिल करने का प्रावधान है, फिलहाल ३० मिनट से कम समय को ओवर टाइम नहीं माना जाता है । हालांकि प्रावधान है कि कर्मचारी ५ घंटे से अधिक लगातार काम न करें । हर ५ घंटे बाद आधे घंटे का विराम आवश्‍यक है ।

ये नियम केंद्र सरकार १ जुलाई, २२ से ही लागू करने वाली थी किंतु अब तक केवल २३ राज्‍यों ने ही श्रम कानून बनाए हैं, ७ राज्‍यों ने नहीं बनाए हैं, उनकी तैयारी न होने से उन्‍होंने ३-४ माह का समय मांगा है, केंद्र सरकार तो १ जुलाई,२२ से ही अधिसूचना जारी करने वाली थी पर अब इन नियमों को १ अक्‍टूबर,२२ से लागू करने की मंशा है.

इसमें मूल वेतन, कुल वेतन का ५० प्रतिशत या उससे अधिक होना चाहिए । मूल वेतन बढ़ने से भविष्‍य निधि व ग्रेच्‍युटी के लिए कटने वाली राशि बढ़ जाएगी क्‍योंकि इसमें जमा पैसा मूल वेतन के अनुपात में होता है । परिणाम होगा कि हाथ में वेतन कम मिलेगा पर सेवानिवृत्‍ति‍ पर भविष्‍य निधि व ग्रेच्‍युटी की रकम बढ़ जाएगी । भविष्‍य निधि अंशदान बढ़ने से उच्‍च और मध्‍यम वेतनभोगियों पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा पर जिनका वेतन कम है उन पर २५ से ३० प्रतिशत का बढ़ सकता है ।

बताते हैं कि ऐसा करने से देश में निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा । यह तो भविष्‍य ही तय करेगा लेकिन १२ घंटे होने से महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों को थोड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है । मुंबई की ही बात करें तो यहॉं नासिक, कर्जत, कसारा, विरार, डहाणु, पालघर आदि स्‍थानों से नौकरीपेशा लोग आते हैं, जिन्‍हें लोकल से आने-जाने में दो-दो, कुल चार घंटे लगते हैं । यदि १२ घंटे की ड्युटी और ४-५ घंटे आने जाने के लिए तो १६-१७ घंटे कर्मचारी घर से बाहर रहेगा तब उसकी घर-गृहस्‍थी, आराम का क्‍या होगा ? इसी कारण कहते हैं कि मुंबईकर व्‍यावहारिक नहीं है । अब यदि १२ घंटे की ड्युटी हुई तो मुंबइकरों की इस परेशानी को भी ध्‍यान में रखना होगा ।

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