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बुलढाणा जिले में कानून व्यवस्था पर सवाल

मा.हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश-निर्देश की पुलीस द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही है।

मुंबई। महाराष्ट्र में राज्य स्तर पर अन्याय-अत्याचार और भ्रष्टाचार के विरूद्ध खुलकर संघर्ष करने वाले पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता वहीद गफ्फार खान ने अब तक गांव से लेकर मंत्रालय तक कई सामाजिक मुद्दों पर करीब 1000 से ज़्यादा शिकायतें,निवेदन दिए हुए हैं।इस वजह से वहीद खान को स्थानिक पुलिस की मदद से कई बार झूठे और बेबुनियाद आरोपों में फसाया गया।

        बताया जाता है की तारीख 28/11/2023 को राज्य पुलिस तक्रार प्राधिकरण मुंबई और मंत्रालय में बुलढाणा जिला पुलिस अधिकारियों की पेशी थी इस बात से चिढ़कर आरोपी और पुलिस अधिकारियों ने मिलकर चांदूर बिस्वा ( ता.नांदूरा जिल्हा बुलढाणा ) गांव में रहने वाले शाकिरुल्लाह खान और उनके परिवार पर कुछ गुंडे ( अत्ताउल्लाह के लड़के ) भेजकर हमला करवाया और वहीद खान और शाकिर उल्लाह खान ने जितने भी शिकायत अर्ज,केस किए हैं सभी को वापस लेने को कहा है,नहीं तो जान से मारने की धमकी उन्हें दी है।अपने बच्चे किसी का कत्ल करने वाले है यह बात जानकर 70 साल के अत्ताउल्लाह खान जो दिल के मरीज भी थे,उनकी तबीयत खराब हो गई उन्हें अस्पताल ले जाया गया और डॉक्टर ने बताया कि हार्ट अटैक से उसकी मौत हुई है।तारीख 29/11/2023 को देर रात में फिर से एक झूठी शिकायत पुलिस थाने में दर्ज की गई, जिसका नंबर है 646/2023 जिसमें आईपीसी 323, ....... कलम लगाई गई,हार्ट अटैक से मौत के 5 दिन बाद फिर्यादी स्थानिक पुलिस व नेता पूढारीयों ने साजिश रची ऐसी लोगों में चर्चा है,और पैसों का लेनदेन करके हत्या की कलम 302 एफआईआर में बढ़ा दिए।

          शाकिरुल्लाह खान और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिलने की वजह से वह गांव छोड़कर छुपते-छुपाते खुद को बचाते हुए फिर रहे हैं।कुछ दिन बाद रजा उल्ला खान यह नांदुरा पुलिस स्टेशन में गया और शकीरा उल्ला खान और अपने परिवार पर तारीख 28 नवंबर को हुए जानलेवा हमले की शिकायत दर्ज करने की विनती की।कानूनी तौर से सीआरपीसी 154 (1) के तहत ठाणे अमलदार,पुलिस स्टेशन नांदुरा इन्होंने एफआईआर दाखल नहीं किया।इसके बाद रजा उल्ला ने जिला पुलिस अधीक्षक साहब को भी सीआरपीसी 154 ( 3 ) के तहत निवेदन दिया।साथ ही साथ माननीय उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय के अनेक आदेश,निर्देश की लिखित जानकारी भी दी की फरीयादी की शिकायत दर्ज करके एफआईआर की कॉपी देना अनिवार्य है,किसी तरह की कोई भी जाँच एफआईआर लिखने से पहले नहीं की जा सकती।ललिता कुमारी विरुद्ध उत्तर परदेश राज्य के प्रकरण में मा.सर्विच्या नय्यलय ने साफ तौर पर ये बात कही है फिर भी स्थानिक पुलिस ने गैर कानूनी तरीके से रजा अल्लाह की एफआईआर लिखने से पहले ही जाँच शुरू कर दी,एफआईआर दाखल नहीं किया गया इसकी वजह यह है की,हत्या का झूठा गुनाह दाखिल करने और शाकिरुल्लाह खान व परिवार पर जानलेवा हमला करने के पीछे कुछ पुलिस अधिकारी शामिल है।स्थानिक पुलिस इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर नहीं लिखना चाहती है,इसलिए वे टाल-मटोल कर रही है। माननीय हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश-निर्देश का पुलीस द्वारा मजाक उड़ाया जा रहा है,बुलढाणा जिले में कानून व्यवस्था पर शक की नजर से कुछ सवाल उठ रहें है।

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